दिल पे आये हुए इलजाम पहचानते है
लोग अब मुझ को तेरे नाम से पहचानते है,
आईना-दार-ए-मोहब्बत हूं कि अरबाब-ए-वफा
अपने ग़म को मेरे अंजाम से पहचानते है।
लोग अब मुझ को तेरे नाम से पहचानते है,
आईना-दार-ए-मोहब्बत हूं कि अरबाब-ए-वफा
अपने ग़म को मेरे अंजाम से पहचानते है।